सिरसा। कंगनपुर व ऑटो मार्केट लिंक रोड पर बने शिव मंदिर के रास्ते को लेकर उठा विवाद अभी शांत नहीं हुआ है। शिवरात्रि पर भोले को चढ़ाने के लिए हरिद्वार से लाई गई कांवड़ भी अभी तक नहीं चढ़ाई गई है तथा कांवडिय़ों की भूख हड़ताल चल रही है। सोमवार को कांवडिय़ों को मनाने तथा रास्ते को लेकर चल रहे विवाद को निपटाने के लिए दिनभर प्रयास चलता रहा। इस प्रयास के बीच मंदिर को जाने वाले रास्ते में प्रशासन की ओर से जो दीवार खड़ी की गई थी, उसे दो बार तोड़ी गई मगर आज फिर से दीवार लगा दी गई है। समाचार लिखे जाने तक कांवडिय़ों की भूख हड़ताल चल रही थी और हरिद्वार से लाई गई कांवड़ भी शिव के चरणों में चढऩे का इंतजार कर रही थी।
पांच दिन बाद उठा सकते हैं खतरनाक कदम
भूख हड़ताल पर बैठे सतीश शर्मा व बंटी वर्मा ने आज कहा कि उन्होंने प्रशासन को पांच दिन का समय दिया है। इस अवधि में मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते को खोलकर प्रशासन की ओर से लिखित में अनुमति नहीं दी गई तो वे उसके बाद कोई खतरनाक कदम भी उठा सकते हैं। उनका कहना है कि वे तब तक कांवड़ नहीं चढ़ाएंगे, जब तक प्रशासन लिखित में विवाद का अंत नहीं करता।
धर्मप्रेमियों ने जताया रोष
मर्यादा सेवा संस्थान के प्रधान वैद्य महावीर प्रसाद ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि प्रशासन ने महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में बड़े नाजुक मुद्दे को छेड़ा है। पूरे देश में कल शिवरात्रि पर्व पर कांवड़ चढ़ी है पर श्री गणेश धर्मार्थ न्यास मंदिर में कांवड़ चढऩे का इंतजार कर रही है जो शिवभक्तों की भावना के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि यह सब प्रशासन की सोची-समझी नीति के तहत हुआ है ताकि शिवभक्तों की धार्मिक भावना को ठेंस पहुंचाई जा सके। श्री गणेश धर्मार्थ न्यास मंदिर व संस्थान के सदस्य खेमचंद गोठवाल ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि यही काम अगर दूसरी बिरादरियों के लोग करते तो प्रशासन चूं तक नहीं करता। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अंबेडकर चौक के पीछ झूंथरा धर्मशाला है, वहां जीटी रोड पर 30 फीट कब्जा किया हुआ है मगर प्रशासन की हिम्मत नहीं है कि वह अवैध कब्जा को हटवाए जबकि वहां पक्के पिल्लर लगाकर अतिक्रमण किया हुआ है। यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है पर प्रशासन मौन है,जबकि शिव मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते को रोक दिया है। इसी प्रकार मर्यादा सेवा संस्थान के सदस्य लक्ष्मी नारायण स्वामी ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि महाशिवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर भोले शंकर को हर साल कांवड चढ़ती थी, पर इस बार नहीं चढ़ी। कांवड़ शिव के चरणों में चढऩे का इंतजार कर रही है। पंडित गोवर्धनदास ने कहा कि ये काम प्रशासन को करना ही था तो शिविरात्रि के बाद कर सकते थे। यह सब जान बुझ कर किया है। उन्होंने कहा कि इस मंदिर से पूरे इलाके के लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है जिस कारण लोगों में आक्रोश है। एमएस सोलंकी ने चेतावनी दी है कि प्रशासन जब तक यहां आकर रास्ता देने की घोषणा नहीं करता, मंदिर में कोई प्रवेश नहीं करेगा। ब्राह्मण सभा के प्रधान सत्यनारायण शर्मा ने भी आज मौके पर जाकर कांवडिय़ों से बातचीत की और कहा कि जहां पर किसी देवता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हो जाती है, वहां सुबह-शाम पूजा-अर्चना जरूरी है। इसलिए प्रशासन को शिव मंदिर में जाने के लिए भक्तों को वैध रास्ता देना चाहिए ताकि शिव की पूजा निर्बाध रूप से होती रहे।
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