Tuesday, February 21, 2012

बैरागी समाज संगठन की बैठक संपन्न

सिरसा। जिला बैरागी समाज संगठन की कार्यकारिणी बैठक गत दिवस स्थानीय सी.एम.के. कॉलेज के नजदीक स्थित स्काई स्टार पत्रिका के कार्यालय में प्रधान रामस्वरूप स्वामी रिसालिया खेड़ा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रधान रामस्वरूप स्वामी ने बताया कि बैरागी समाज संगठन अब पंजीकृत हो गई है तथा संगठन का मुख्य उद्देश्य बैरागी समाज के सभी बन्धुओं को आपस में जोडऩे के लिए समय-समय पर नुक्कड़ सभाएं आयोजित करना तथा बिरादरी व धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ आपसी सुख-दुख में तालमेल स्थापित करते हुए सभी बन्धुओं का अधिक-से-अधिक संख्या में एकत्रित होने के लिए प्रयास करना है। बैठक में रामपुरा बिश्नोईयां के पूर्व सरपंच सोहनलाल, सतपाल जमाल, हरीराम ढुकड़ा, आदराम कनिष्ठ अभियन्ता, महावीर प्रसाद सोडा, प्रकाश पटवारी, महेन्द्र स्वामी तथा स्काई स्टार पत्रिका के सम्पादक आसाराम स्वामी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 

शिवरात्रि के अवसर पर समिति द्वारा कीर्तन आयोजित

सिरसा। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा दरबार सेवा समिति, एडीशनल मंडी की ओर से स्थानीय ए-ब्लाक में स्थित एकता पार्क में शिवलिंग के समक्ष भजन-कीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इससे पूर्व दरबार में दिनभर भगवान शिव का जाप किया गया। वहीं पार्क में शिव भक्तों ने सुबह से शाम तक शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। शाम ढलने के बाद भक्तों ने पूजा अर्चना की। कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए दरबार के प्रवक्ता ओम ठकराल ने बताया कि दरबार की संचालिका किरण मंूड के दिशा-निर्देश पर पार्क में महाशिवरात्रि पर्व पर भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। इस दौरान दरबार के सैकड़ों भक्तों ने रात 9 बजे से लेकर रात्रि एक बजे तक भगवान शिव के भजन गए। अंजू ग्रोवर, प्रवीन और सपना द्वारा गाए गए इन भजनों पर सभी भक्त झूम उठे। रात को सवा बारह बजे दूसरे पहर की पूजा की गई। इस दौरान भक्तों ने जल, दूध, भांग, फल इत्यादि चढ़ाए। उसके बाद भोले बाबा की आरती की गई। इस अवसर पर साहबराम मंूड, रमेश मेहता आढ़ती, सुभाष मेहता, श्याम मेहता, नरेश सेठी, राजेश मेहता, अलका डूमरा, रेणू, अनीता सहित सैकड़ों भक्त मौजूद थे। 

भारद्वाज बने शूटिंग बॉल एसोसिएशन के प्रधान

सिरसा। रेलवे क्लब में शूटिंग बाल एसोसिएशन के सर्व सम्मति से हुए चुनावों में क्लब के वरिष्ठ सदस्य आर. के. भारद्वाज को प्रधान चुना गया । इस मौके पर हुई चुनावी बैठक में क्लब के सभी खिलाड़ी उपस्थित थे । श्री भारद्वाज को प्रधान चुनने के पश्चात रणजीत सिंह मोंगा को महासचिव, जसवंत सिंह बराड़ वरिष्ठ उपप्रधान, दलीप सिंह व बदन सिंह मंडल को उपप्रधान, भरत राज सचिव, गीता मंडल संयुक्त सचिव, बंता सिंह कोषाध्यक्ष व मा. लेखराज को प्रचार सचिव चुना गया । इसके अलावा कार्यकारिणी में नरेन्द्र मैहता, ओमप्रकाश लूना, अशोक कंबोज, रणबीर सिंह राणा, सुभाष सेतिया, राजेश कस्वां, रामकुमार, सुभाष फुटेला, धर्मेन्द्र चन्नी, शंटी कुक्कड़ व बलवंत गांधी को लिया गया। इस अवसर पर नवगठित शूटिंग बाल एसोसिएशन के सदस्यों को संबोधित करते हुए प्रधान आर. के. भारद्वाज ने कहा कि आगामी 3-4 मार्च को रेलवे क्लब में ऑल इंडिया शूटिंग बाल प्रतियोगिता करवाई जाएगी। जिसमें कई राज्यों की टीमें भाग लेने के लिए सिरसा पहुंचेंगी। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में विजेता टीम को 11 हजार रूपए व दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 71 सौ रूपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा बाहर से आने वाली टीमों को किराया भत्ता, उनके रहने व खाने-पीने का इंतजाम भी एसोसिएशन की ओर से किया जाएगा ।

गृहस्थ में रहकर भी हो सकती है ईश्वर प्राप्ति: रघुबीर

सिरसा। अखिल भारतीय श्री राम-मुलख-दयाल योग प्रचार समिति के प्रधान योगाचार्य गुरू रघुबीर महाराज ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर दिव्य योग साधना मन्दिर कोटली में उपस्थित साधकों को अपने सम्बोधन में फरमाया कि भगवान शंकर नर में नारायण हैं। उनकी पवित्र मूर्त को देखते ही ध्यान लगने लग जाता है तथा शरीर में एक दिव्य मस्ती का अनुभव होने लगता है। उनका ध्यान करने से पाप स्वत: ही जलते हैं और पुण्यों का विस्तार होता है। पाप मनुष्य को गिराते हैं और पुण्य स्वर्ग की ओर लेकर जाते हैं। उनकी महिमा अपरम्पार है। रघुबीर महाराज ने बताया कि शकंर भगवान ने काम को जीता है। वे आदर्श गृहस्थ हैं। उनके परम पवित्र जीवन से भारतीय समाज को यह प्रेरणा मिलती है कि भोले भगवान की तरह हम भी गृहस्थ में रहकर ईश्वर को प्राप्त कर सकते हंै। महाशिवरात्रि का अर्थ यह है कि महाशिवरात्रि भोग में नहीं भजन में गुजारो। गृहस्थी का अधिकांश सुख व खुशियां ब्रह्माचर्य व संयम पर निर्भर करता है। काम ही ज्ञान मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। काम को वश में करके जीवन में ज्ञान को प्राप्त किया जा सकता है और ज्ञान को मिटाया जा सकता है। जिस घर में काम है उसमें राम नहीं, जिसमें राम है उसमें काम नहीं। काम मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, वह मनुष्य को दूर ले जाता है और जीवन को बाहरी नश्वर संसार में भटकाता रहता है। काम मनुष्य को अंतर्मुखी नहीं होने देता, कामी व्यक्ति का अंत निश्चय से ही दुखदायी है। दुनिया काम को जगाना तो जानती है लेकिन इसको वश में करना नहीं जानती। काम को गुरू कृपा से जीता जा सकता है।